देखभाल नियंत्रण नहीं
अपने शरीर, पढ़ाई, काम, आने-जाने, पैसे, रिश्तों, आस्था और भविष्य से जुड़े फैसलों में वयस्क महिला की इच्छा मायने रखती है।
पितृसत्ता तोड़ो
हानि पहचानें, समझें कि कानून और संस्थाएँ क्या कर सकती हैं, अधिक सुरक्षित कदम चुनें और किसी महिला की स्वतंत्रता छीने बिना उसका साथ दें।
पितृसत्ता तोड़ो महिलाओं और बालिकाओं के लिए भारत-केंद्रित जनहित वेबसाइट है। यहाँ अधिकार, सुरक्षा, स्वतंत्रता और रोज़मर्रा की समानता पर हिंदी और अंग्रेज़ी सामग्री है।
पितृसत्ता तोड़ो क्या है?आपको कानूनी शब्द, खाता या पूरी योजना की जरूरत नहीं है। जिस कारण आप आई हैं, उसके सबसे करीब का रास्ता चुनें।
कोई महिला अपने पिता, भाई, पति, साथी, बेटे, परिवार, जाति, समुदाय या किसी और की संपत्ति नहीं है। वह अपने आप में पूर्ण और स्वतंत्र व्यक्ति है।
अपने शरीर, पढ़ाई, काम, आने-जाने, पैसे, रिश्तों, आस्था और भविष्य से जुड़े फैसलों में वयस्क महिला की इच्छा मायने रखती है।
बड़ों का कर्तव्य बालिकाओं की सुरक्षा, उम्र के अनुसार सीमाएँ और उनकी बात सुनना है; सुरक्षा को नियंत्रण न बनाएँ।
कपड़े, चुप्पी, परिवार की इज़्ज़त, भाग्य, कर्म या कथित पिछला जन्म किसी दूसरे व्यक्ति की हिंसा का कारण नहीं हैं। जिम्मेदारी हिंसा करने वाले की है।
मुद्दा पुस्तकालय सटीक व्यवहार, उसका नुकसान, संभावित कानून, सुरक्षित विकल्प, सहायता और संस्थागत जिम्मेदारियाँ समझाता है।
घर की हिंसा केवल शारीरिक हमला नहीं है। इसमें यौन दबाव, अपमान, अलगाव, धमकी, धन पर नियंत्रण, निगरानी और रोज़मर्रा के फैसलों को असुरक्षित बनाने वाली रोक शामिल हो सकती है।
पूरी मार्गदर्शिका पढ़ेंजिस तरह का उत्तर चाहिए, वह रास्ता चुनें। कानून, योजना, सहायता और संस्थागत बदलाव अलग मार्ग हैं।
समानता में महत्वाकांक्षा, आत्मनिर्भरता, भागीदारी, मित्रता, खुशी और आराम भी शामिल हैं—सिर्फ हिंसा से मुक्ति नहीं।
सीखेंकमाएँमालिक बनेंफैसला लेंआराम करेंनेतृत्व करें
उचित वेतन, सुरक्षित काम, बैंकिंग, दस्तावेज़, संपत्ति, पेंशन और अपनी कमाई पर नियंत्रण।
हर उम्र में सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवा, निजता, सहमति और प्रजनन संबंधी दबाव से स्वतंत्रता।
परिवार, संस्था, समुदाय, राजनीति और सार्वजनिक जीवन में वास्तविक निर्णय शक्ति।
परिवार, स्कूल, कार्यस्थल और सार्वजनिक सेवाओं को हानि रोकनी, सुरक्षित प्रतिक्रिया देनी और बदले की कार्रवाई रोकनी चाहिए।
शरीर की सीमाएँ सिखाएँ, देखभाल और धन की जिम्मेदारी बराबर बाँटें, बताई गई बात पर विश्वास करें और इज़्ज़त के नाम पर नियंत्रण न करें।
सहमति और डिजिटल सुरक्षा सिखाएँ, कर्मचारियों को प्रशिक्षित करें, शिकायत करने वालों की रक्षा करें और लड़कियों पर रोक लगाने के बजाय असमान नियम बदलें।
उत्पीड़न रोकें, कानूनी शिकायत व्यवस्था बनाए रखें, निजता और सुगम्यता दें और बदले की कार्रवाई के बिना काम करें।
“मुझे आपकी बात पर विश्वास है। यह आपकी गलती नहीं है। आज आपके लिए क्या उपयोगी या अधिक सुरक्षित होगा?”
“अगला कदम तय करते समय मैं आपके साथ रह सकती या सकता हूँ।”
“मैं आपकी अनुमति के बिना आपकी कहानी साझा नहीं करूँगी या करूँगा।”साथ देने का तरीका जानें
संभव हो तो सुरक्षित जगह जाएँ और आपात 112 पर कॉल करें। वेबसाइट खतरे का आकलन या प्रतिक्रिया की गारंटी नहीं दे सकती।