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घरेलू हिंसा और जबरन नियंत्रण

घर में हिंसा केवल मारपीट नहीं है। डर, निगरानी, अपमान, यौन दबाव, अलगाव या धन, दवा, काम और आवाजाही पर नियंत्रण भी हिंसा हो सकती है।

यदि किसी को तुरंत खतरा हो सकता है, तो 112 पर कॉल करें

इस मार्गदर्शिका में

यह किस तरह दिखाई दे सकता है

रिश्ता तब भी असुरक्षित हो सकता है जब नुकसान पहुँचाने वाला व्यक्ति माफी माँगता हो, बाहर अच्छा दिखता हो या उसने शारीरिक हिंसा न की हो।

  • कॉल, लोकेशन, कपड़े, मित्रता, काम, पढ़ाई या मायके जाने पर निगरानी।
  • कमाई लेना, भोजन या दवा रोकना, कर्ज़ बनाना, सामान तोड़ना या पहचान-पत्र अपने पास रखना।
  • बच्चों, रिश्तेदारों, पालतू जानवर, आत्महत्या, घर से निकालने या बदला लेने की धमकी देकर मनवाना।
  • धक्का, रोकना, गला दबाना, जलाना, अनचाहा यौन व्यवहार या गर्भनिरोध में बाधा।

यह हानिकारक क्यों है

  • नियंत्रण धीरे-धीरे विकल्प इतने कम कर सकता है कि सामान्य निर्णय भी खतरनाक लगने लगें; छोड़ने के समय जोखिम बढ़ सकता है।
  • हिंसा देखने, सुनने या उसके बीच रहने से बच्चे भी प्रभावित होते हैं, चाहे उन पर सीधा हमला न हुआ हो।

कानून क्या मान सकता है

घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम अपने दायरे के घरेलू रिश्तों में शारीरिक, यौन, मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक दुर्व्यवहार को शामिल करता है।

संभावित राहतों में संरक्षण, निवास, धन, अभिरक्षा, क्षतिपूर्ति और अंतरिम आदेश शामिल हैं; खास कृत्यों पर अलग आपराधिक कानून भी लागू हो सकते हैं।

दायरा, सबूत, मंच और राहत रिश्ता तथा तथ्यों पर निर्भर हैं। हेल्पलाइन या शिकायत से आदेश, गिरफ्तारी, आश्रय या समय-सीमा की गारंटी नहीं होती।

अधिक सुरक्षित अगले कदम

केवल वही विकल्प चुनें जो परिस्थिति के अनुकूल हो। सुरक्षा, समय, धन, दिव्यांगता, पारिवारिक नियंत्रण और डिवाइस की निगरानी से उपलब्ध विकल्प बदल सकते हैं।

  1. तत्काल खतरे पर ध्यान दें

    संभव हो तो सुरक्षित निकास या लोगों वाली जगह जाएँ और 112 पर कॉल करें। सामना करने से खतरा बढ़े तो सामना न करें।

  2. हिंसा के ढर्रे के अनुसार योजना बनाएँ

    एक भरोसेमंद व्यक्ति, संकेत-शब्द, सुरक्षित यात्रा और जाने की जगह तय करें। योजना वहाँ न रखें जहाँ वह व्यक्ति देख सके।

  3. केवल सुरक्षित हो तो जरूरी चीज़ें बचाएँ

    पहचान, बैंक और चिकित्सा रिकॉर्ड की प्रतियाँ, दवाएँ, चाबियाँ और बच्चों की जरूरी चीज़ें सोचें; इन्हें लेने के लिए तत्काल निकलना न टालें।

किसी का साथ कैसे दें

स्थिति की उसकी समझ महत्वपूर्ण है। सहायता उसके विकल्प बढ़ाए, नया नियंत्रण न बने।

क्या मदद कर सकता है

  • विश्वास करें और पूछें कि अभी क्या उपयोगी होगा।
  • सुरक्षित फोन, यात्रा, बच्चों की देखभाल, दस्तावेज़ की प्रतियाँ या कॉल के समय साथ जैसी ठोस मदद दें।

किन बातों से बचें

  • नुकसान पहुँचाने वाले व्यक्ति से संपर्क या धमकी न दें।
  • उसे अपनी समय-सीमा पर छोड़ने, रिपोर्ट करने या समझौता करने को मजबूर न करें।

आप ये शब्द कह सकते हैं

“मैं तुम पर विश्वास करती हूँ। यह तुम्हारी गलती नहीं है।”
“आज रात या अगले एक घंटे को क्या अधिक सुरक्षित बना सकता है?”

परिवारों और संस्थाओं को क्या करना चाहिए

पुलिस और न्याय व्यवस्था

पुलिस, अदालत और विधिक सेवाएँ

  • बिना दोष या दबाव के उपलब्ध रास्ते समझाएँ।
  • संदर्भ और कार्यवाही में निजता, सुगम्यता और सुरक्षा रखें।

स्वास्थ्य सेवाएँ

स्वास्थ्य सेवाएँ

  • तत्काल चोट का उपचार करें और सहमति व रिकॉर्ड समझाएँ।
  • संभव हो तो अकेले में पूछें और परिवार की अनुमति को उपचार की शर्त न बनाएँ।

मदद और व्यावहारिक सहायता पाएँ

112 पर कॉल करें

तत्काल खतरे या पुलिस, अग्निशमन या चिकित्सा के आपात समन्वय के लिए।

पूरे भारत की आपात सेवा

कॉल या ऐप अनुरोध में आपका नंबर, आवाज़ और स्थान उत्तरदाताओं के साथ साझा हो सकता है।

सेवा खोलें

महिला हेल्पलाइन 181 पर कॉल करें

महिलाओं के विरुद्ध हिंसा पर जानकारी, सहायता और उचित सेवा से संपर्क के लिए।

आधिकारिक FAQ में अभी पश्चिम बंगाल को छोड़कर सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश सूचीबद्ध हैं; स्थानीय प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

सुरक्षित हो तो विवरण देने से पहले पूछें कि क्या दर्ज या साझा किया जाएगा।

सेवा खोलें

कानूनी सहायता हेल्पलाइन 15100 पर कॉल करें

महिलाएँ और बच्चे निःशुल्क विधिक सेवाओं के पात्र समूहों में शामिल हैं।

पात्रता से किसी खास वकील, राहत या नतीजे की गारंटी नहीं होती।

सेवा खोलें

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